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Emotional Poems In Hindi

emotional poem
Written by HindiMeStatus

emotional poems

नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है आपकी अपनी वेबसाइट HINDIMESTATUS.com पर| आज हम आपके लिए emotional poems in Hindi का बेस्ट कलेक्शन लेकर आये है|

जिनको आप नीचे पढ़ोगे ॥

इन कवितायों को पढ़कर आपको लगेगा की कहीं ना कहीं इन कवितायों के शब्द आपकी ही ज़िंदगी को ब्यां करते हैं,

जैसे मानो ये शब्द आपकी ही कहानी बता रहे हो ,

आशा करते हैं की आपको ये कविताये पसंद आएंगी ॥

#1.आसान नहीं होता

आसान नहीं होता टूटे हुये सपने लेकर फिर से एक नया ख्वाब सजाना ,
आसान नहीं होता move on कह कर फिर से ज़िंदगी की नयी शुरुआत करना ..
आसान नहीं होता तन्हाइयों मे अश्क बहाकर फिर से मुस्कुराहट के साथ दुनिया का सामना करना, 
आसान नहीं होता दिल मे दर्द छिपा कर फिर से खुद को एक मजबूत इंसान बनाना.. 
आसान नहीं होता यादों के शहर से निकाल कर फिर से एक नयी दुनिया बसाना ,
आसान नहीं होता दिल टूट जाने पर फिर से ज़िंदादिली से जीना.. 
आसान नहीं होता धोखे का खंजर खा कर फिर से अपने अंदर विश्वास की ज्योत जलाना,
आसान नहीं होता अतीत के जख्म भुला कर फिर से अपनी एक नयी शख्शियत बनाना .
आसान नहीं होता एक अजनबी को अपना बना कर फिर से अजनबी बनाना,
आसान नहीं होता बीच मोड़ मे किसी को अलविदा कह कर फिर से एक नया रास्ता ढूंड्ना..
आसान नहीं होता एक किस्सा खतम कर के फिर से एक नयी कहानी लिखना,

जी आसान नहीं होता,और किसी के लिए भी आसान नहीं होता,
पर सच तो ये है की impossible भी नहीं होता,
क्यूंकी ज़िंदगी एक जंग है , 
या तो योद्धा बन कर जी लो या कायर बन कर काट लो..

#2.आखिर कब तक ?

अतीत के पन्नो को यूं बार -बार कब तक खोलेगा ,
रोज़ एक भ्रम में जीकर कब तक खुद से खेलेगा ॥
जिस राह में नहीं है मंज़िल कब तक उस में भटकेगा
टूटे हुए सपनों को ले कर कब तक खुद से भागेगा 
बंद दरवाज़ो पर नज़रे टिकाये कब तक मायूस बैठेगा ,
अपने हालातो पर बेचारा बनकर कब तक ऐसे ही रोएगा 
जो बीत गया सो बीत गया ,वो एक पन्ना था पूरी किताब नहीं 
जो बदल गया सो बदल गया ,वो एक पन्ना था पूरी किताब नहीं
बीती हुई बातों को अब तुझे भूलना होगा,
जिस शहर में तेरा मकान नहीं , अब वहाँ से निकलना होगा 
क्या हुआ जब चारो तरफ है अंधेरा,
यकीन कर खुदा पर , आयेगा फिर से नया सवेरा
वक़्त के साथ कुछ कर अब ऐसी यारी ,
फिर से ना टूटे बन कर मूरत नियारी 
अपनी मुस्कुराहट के साथ ऐसा रिश्ता जोड़ ले ,
की गम तेरी राहो से अब खुद ही मुंह मोड़ ले ॥
ज़िंदगी है एक वरदान,इसका मोल जान ले ,
नहीं मिलेगी दोबारा अब तो इसको संवार ले

#3. क्या खूब बनाया ए खुदा तूने इंसान को?

क्या खूब बनाया ए खुदा तूने इंसान को,
की अब तू खुद न पहचान पाएगा अपनी इस अनोखी करामात को ,
हर शख्स यहाँ झूठा है ,मुखोटा लगाता वो फरेब का है
विश्वास का वास्ता देकर किसी की दुनिया को लूटता है 
झूठी कसमों की जंजीरों से किसी के दिल को तोड़ता है 
इस रंगीन दुनिया के नज़ारे भी नजरे भी कितने रंगीन हैं
यहाँ खेल खिलोनों से नहीं किसी के दिलो से खेले जाते हैं 
हर चेहरे पर अब नकाब नज़र आता है ,
हर इंसान अब झूठा नज़र आता है 
ए खुदा तू ही बता क्या है मेरी खता ?
क्या हर इंसान पर भरोसा करना गलती थी मेरी?
क्या हर इंसान में इंसानियत देखना खता थी मेरी ?
हो सके तो बस अब इतना एहसान करना 
मेरे जहन में से विश्वास शब्द का नामो निशान मिटा देना

 

कविताये कैसे लगी ?कमेंट्स करके ज़रूर बताए ॥

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