होली का महत्व, निबंध, होलिका दहन का इतिहास और कहानी

शीर्षक : होली का महत्व |

खुशियों की महक रंगो की बहार, होली का त्यौहार आने को तैयार, थोड़ी सी मस्ती, थोड़ा सा प्यार, रंगो से भरा रहे आपका संसार…!

नमस्कार दोस्तो,आपका स्वागत है आपका आपकी अपनी वेबसाइट HindiMeStatus.com पर, आपको यह जानकर बहुत खुशी होगी की हम आपके लिए लेकर आये है होली पर निबंध का बेस्ट कलेक्शन| तो चलिये लेख पढ़ना शुरू करते है

होली हिन्दुओ का एक पवित्र त्यौहार है जिसे वसंत ऋतु मे मनाया जाता है| हिन्दू ही नहीं सभी मझहब के लोग इसे बड़े उल्लास के साथ मनाते है| इस दिन पूरा भारत होली के रंग मे रंग जाता है| और सभी अपने घरो मे अच्छे-अच्छे पकवान बनाते है|

होली का महत्व बहुत कम लोगों को पता है इसलिए आज हम आपके लिए लेकर आए है होली का महत्व जो एकदम सच्ची कहानी है| आपको इसका महत्व पता होना चाहिए इसलिए यह आपके लिए महत्वपूर्ण है|

होली पर निबंध को आप ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर कीजिये जिससे की और लोग भी देख सके और खुद भी इस्तमाल कर सके| आप इन्हें कॉपी पेस्ट भी कर सकते है| तो चलिए लेख पड़ना शुरू करते है.

होली शायरी का बेस्ट कलेक्शन हिंदी में

होली क्यों मनाई जाती है – होली पर निबंध

होली पर निबंध हिंदी में

होली क्यों मनाई जाती है और होली का क्यों जलायी जाती है इसके पीछे क्या मान्यता है?

तो इसके पीछे एक बहुत बड़ी कहानी जुड़ी हुई है जो हिन्दू और भागवत के अनुसार सत्य की जीत साबित होती है तो आज हम बात करते है इसी कहानी की जो की झाँसी लगभग 80 किलोमीटर दूर एरच नगर है|

जिसकी मान्यता है की यह सतयुग में राक्षस हिरण्यकश्यप नामक राजा की राजधानी हुआ करती थी जिसने आतंक और भय के कारण सम्पूर्ण पृथ्वी पर लोगो का जीना मुश्किल कर दिया था|

हिरण्यकश्यप ने घोर तपस्या कर भगवाना ब्रह्मा से वरदान लिया था की वह ना रात में मरे ना दिन ना उसे नार मार पाये और ना नार ना पशु मार पाये और ना पक्षी ना कोई देवता मार पाये और ना कोई राक्षस ना अस्त्र ना कोई शास्त्र कोई भी उसकी मृत्यु ना कर पाये.

जब उसे भगवान ने वरदान दे दिया तो उसने सम्पूर्ण राज्य में घोषणा कि की अब भगवान विष्णु की पुजा कोई नहीं करेगा अब उसकी पूजा होगी जो उसकी पुजा नहीं करेगा उसे मृत्यु दंड मिलेगा|

प्रहलाद की कहानी – Holi Essay in Hindi

मृत्यु दंड के डर से सभी लोग उसकी पूजा करने लगे लेकिन उसका स्वयं का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त निकला|

उसने अपने पिता की पूजा करने से इंकार कर दिया जिससे नाराज होकर हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रह्लाद को मारने का कई बार प्रयास किया परंतु भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद हर बार बच गया.

हिरणाकश्यप ने अपने बेटे को मरवाने के लिए कई उपाय किए कभी प्रहलाद को मरवाने के लिए साँपो के तेखाने मे बंद किया तो कई बार हाथी के पेरो से कुचल वाने का प्रयास करवाया|

जब वह असफल रहा तो उसने अपने सैनिकों को प्रहलाद को डिकोली पर्वत से नीचे फेकने का आदेश दिया|

सैनिकों ने प्रहलाद को पर्वत से नीचे वेद्तुया नदी में फेक दिया| लेकिन भगवान विष्णु ने स्वंय प्रहलाद को अपनी गोद मे बैठा कर बचा लिया| भक्त प्रहलाद को पर्वत से फेकने के कारण आज इस पर्वत को डिकोली नाम से जाना जाता है.

जब हिरण्यकश्यप अपने बेटे प्रहलाद को मारने में असफल रहा तो हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने कहा की उसे वरदान है की वह आग में नही जल सकेगी और वह अपनी गोद मे प्रहलाद को लेकर बेठ जाएगी जिसे प्रहलाद आग में जल कर मर जाएगा.

एरच में लकड़ियो का एक डेर बनाया गया जिस पर होलिका गोद मे प्रहलाद को लेकर बेठ गई और उसमे आग लगा दी गई|

लेकिन फिर एक बार भगवान विष्णु की कृपा प्रहलाद पर पड़ी और वह बच गया परंतु होलिका वहाँ पर जल गयी| तब से होलिका दहन किया जाने लागा|

तब स्वय हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने की कोशिश की और भगवान विष्णु ने नारसिंह का अवतार लिया जोकि सिंह और नर का अवतार था और अपने नाखूनो से हिरण्यकश्यप को मार दिया|

तब पहली बार झाँसी में रंग गुलाल के साथ होली का त्योहार मनाया गया| इतिहासकार बताते है की झाँसी के ऐरच को भक्त प्रहलाद नागरी नाम से भी जाना जाता है जिसके कई प्रमाण भी मिलते है| हिरण्यकश्यप राजधानी का उलेख श्रीमत भागवत और कई पुराणो में मिलता है|

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एक बार फिर से आप सभी को HindiMeStatus.com टीम की और से होली की हार्दिक शुभकामनाएँ| 🙂

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