भारत देश के महान देशवासियों के लिए देश भक्ति कविता हिंदी में

आज का हमारा शीर्षक है देश : देश भक्ति कविता

नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है HindiMeStatus.com पर| आज हम आपके लिए लेकर आये है देश भक्ति कविता का बेस्ट कलेक्शन| यह बहुत शानदार कविता है|

हमारा देश कई वर्षो तक ब्रिटिश सरकार का गुलाम रहा तो हमारे देश के महान पुरुषो ने इसका बहिष्कार किया था इसी के चलते हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था और हर साल इस दिन को बड़े ही धूम धाम के साथ मनाते है.

लेकिन जो इस लड़ाई में शहीद हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए पुरे भारत वर्ष में प्रार्थना होती है| इस दिन कई आँखे नम भी होती है तो कही शान से जीने की नई उमंग मिलती है क्योंकि इस दिन हमारे महान देशवासियों ने देश को आजाद तो कराया और अपना बलिदान भी दे दिया.

15 अगस्त वाले दिन पुरे देश के विधायालो में बड़ी धूम धाम के साथ इस दिन का स्वागत होता है और सभी बच्चे इसमें बड चढ़ कर हिस्सा लेते है.

कई बच्चे देश भक्ति कविता भी सुनाते है और जो बच्चे कविता ढूंढ नहीं पाते है उनके लिए हम लेकर आये है देश भक्ति कविता का बेस्ट कलेक्शन|

यह देश भक्ति कविता बहुत ही सुंदर और शानदार है यह कविताये सभी को बहुत पसंद आएँगी और यह सबके मन को बहुत भाएगी

देश भक्ति बाल कविता को आप ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर कीजिये जिससे की और लोग भी देख सके और खुद भी इस्तमाल कर सके| आप इन्हें कॉपी पेस्ट भी कर सकते है| तो चलिए लेख पड़ना शुरू करते है.

Desh Bhakti Kavita in Hindi 2018 – देश भक्ति बाल कविता

Desh Bhakti Kavita in Hindi

वीर तुम बड़े चलो
धीर तुम बड़े चलो
हाथ में ध्वजा रहे
बाल-दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नहीं

दल कभी रुके नहीं
वीर तुम बड़े चलो
धीर तुम बड़े चलो
सामने पहाड़ हो
सिंह का दहाड़ हो

तुम निडर हटो नहीं
तुम निडर डटो वही
वीर तुम बड़े चलो
धीर तुम बड़े चलो
मेघ गरजते रहे

मेघ बरसते रहे
बिजलियाँ कड़क उठे
बिजलियाँ तडके उठे
वीर तुम बड़े चलो
धीर तुम बड़े चलो

प्रात हो की रात हो
संग हो ना साथ हो
सूर्या से बड़े चलो
चंद्र से बड़े चलो
वीर तुम बड़े चलो

धीर तुम बड़े चलो
एक ध्वज लिए हुए
एक प्रण किये हुए
मातृ भूमि के लिए
पितृ भूमि के लिए

वीर तुम बड़े चलो
धीर तुम बड़े चलो
अन्न भूमि में भरा
वारि भूमि में भरा
यत्र कर निकाल लो

रत्र भर निकाल लो
वीर तुम बड़े चलो
धीर तुम बड़े चलो

Desh Bhakti Kavita in Hindi For Class 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 – रुला देने वाली देश भक्ति पोएम हिंदी में

Desh Bhakti Kavita in Hindi For Class 4

जग में सुंदर देश हमारा
अपना भारत है हमे
अपने प्राणों से प्यारा
नदी, खेत, बाग़ और वन

देते है सुंदर जीवन
यहाँ है खुबसूरत
पर्वतो का नजारा
जग में सुंदर देश हमारा

राम, कृष्ण, गौतम और गाँधी का देश
यहाँ है काले, गोरे
सभी रंग विशेष
बहती पवित्र नदियाँ गंगा, यमुना और नर्मदा

करती है सिंचित जीवन सर्वदा
चलती रहे ये जीवन धार
जग में सुंदर देश हमारा
हिन्दू, मुस्लिम, सिख और इसाई

हर धर्म के लोग अनेक
मानवता ही धर्म हमारा
जिस-से बने हुए है हम सब एक’
काले गोरे में भेद नहीं

हम सब में मतभेद नहीं
बना हुआ है हम
सब में भाईचारा
जग में सुंदर देश हमारा

हमारे देश की है यही संस्कृति
ईद, दिवाली, होली, क्रिश्मस
सब त्यौहार है लोग मानते
मिल जुल कर है सब गाते

सुंदर राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान प्यारा
जग में सुंदर देश हमारा
अपना भारत है हमे
अपने प्राणों से प्यारा…

Patriotic Poem in Hindi For Independence Day – देश प्रेम पर छोटी कविता

Patriotic Poem in Hindi For Independence Day

अपना झंडा हमको ज्यादा, प्यारा
अपनी जान से
युगों – युगों तक लहराएगा, सदा
तिरंगा शान से

केसरिया रंग है झंडे में
शौर्य, वीरता, त्याग का
हरा रंग है खुशहाली और,
जन – जन के अनुराग का

सफ़ेद रंग तो सदा चाहता, सबको
शांति जहान से’
अपना झंडा हमको ज्यादा, प्यारा
अपनी जान से

इस झंडे के साथ देश का
स्वाभिमान भी ऊँचा है
कसम हमे ना होने देंगे
इस झंडे को नीचा है

नीला चक्र मध्य में कहता, बढे
प्रगति-रथ शान से
अपना झंडा हमको ज्यादा, प्यारा
अपनी जान से

इस झंडे का मान बढाने
प्राण दिए है वीरो ने
पा आजादी लाला किले पर
फहराया रणधीरों ने

झंडा गीतों की स्वर लहरी
गूंजे दूर वितान से
अपना झंडा हमको ज्यादा, प्यारा
अपनी जान से

Short Patriotic Poem in Hindi For School Students – देशभक्ति कविता बच्चों के लिए

Short Patriotic Poem in Hindi - देशभक्ति कविता बच्चों के लिए 

आजादी के साल हुए कई
पर क्या हमने पाया है
सोचा था क्या होगा लेकिन

सामने पर क्या आया है
रामराज्य-सा देश हो अपना
बापू का था सपना

चाचा बोले आगे बढ़ कर
कर लो सबको अपना
आजादी फिर छीने ना अपनी

दिया शास्त्री ने नारा
जय-जयकार किसान की अपनी
जय जवान हमारा

सोचो इनके सपनो को हम
कैसे साकार करेंगे
भ्रष्टाचार हटा देंगे हम

आगे तभी बढेंगे
मुश्किल नहीं पूरा करना
इन सपनों का भारत

अपने अन्दर की शक्ति को
करो अगर तुम जाग्रत
आओ मिलकर कसम ये खाए

ऐसा सभी करेंगे
शिक्षित हो अगर हर बच्चा
उन्नति तभी हम करेंगे

Popular Desh Bhakti Kavita in Hindi – सैनिकों पर हिंदी में देश भक्ति कविता

Popular Desh Bhakti Kavita in Hindi

लाखो बलिदान करोडो अरमान के
बाद
आया वो दिन
15 अगस्त 1947
लोग कहते है

भारत आजाद हुआ था इस दिन
पर क्या भारत को मिली आजादी
आजादी तो हिन्दू, मुस्लमान, सिख
और सभी धर्मवलंबियो को मिली
बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र तमिलनाडु

और अनगिनत प्रांतो को मिली
पर क्या भारत को मिली आजादी
आजादी के जश्न में हिन्दुओ ने होली
खेली मुसलमानों ने ईद मनाई
इसियो ने इस्टर तो सिखों ने

भांगड़ा पाया
सब अपने धर्म की धुनी रमाते
खुद को उच्च दुसरे को तुच्छ बताते
आज हो गए है दूर इतना
की मिल गया वैर वैमनस्य को नया

घर आपना
मै पंजाबी, मै मराठा, मै बंगला, मै गुजरती
सबने बना ली है अपनी नई पहचान
शायद न रहा इन्हें अब
“भारत’’ शब्द का भी मान

खुद को आज भी जकड़ा देख
धर्म प्रांत की बेड़ियों में
भारत यही सोचती यही पूछती होगी
हम सब से
क्या मुझको मिली आजादी

कहते है अंग्रेजो ने भारत को
कुछ इस कदर लुटा की
सोने की चिड़िया का रंग हुआ कलूटा
यह आधी सच्चाई है अंग्रेजो ने तो
चिड़िया को बस किया था अपंग

उसे कला करने की जहमत
खुद हमे उठाई है
मस्जिदों के अजान में कही
गुम हो गया है राष्ट्रगान
लोग अदब से झुकते है

प्राथर्ना और फरियाद में
पर खड़ा ना हो पाते
कुछ पल राष्ट्रगान के सम्मान में
मुझे था बस यही कहना
कर दो आजाद अब बेड़ियाँ चुभती होंगी

“भारत माँ’’ की सिसकियाँ हमसे यही
कहती होंगी
धर्म और प्रांत से बड़ी होती है राष्ट्रीयता
तुम्हारा प्रांत है सारा भारत
धर्म तुम्हारी भारतीयता. मंदिरों की प्रार्थना

Special Desh Bhakti Speech in Hindi – Independence Day Special Speech in Hindi

Independence Day Special Speech in Hindi

पराधीनता को जहाँ समझा ज्ञपा महान
कण – कण के खातिर जहाँ हुए कोटि बलिदान
मरना पर झुकना नहीं मिला जिसे वरदान
सुनो – सुनो उस देश के शुर-वीर संतान
आन-मान अभिमान की धरती पैदा करती
दीवाने

मेरे देश के लाल हठीले शीश झुकाना क्या
जाने
दूध-दही की नदिया जिसके
आँचल में कलकल करती
हिरा, पन्ना, माणिक से है
पटी जहां की शुभ धरती

हल की नोके जिस धरती की
मोती से मांगे भरती
उच्च हिमालय के शिखरों पर
जिसकी ऊँचा ध्वज फहराती
रखवाले ऐसी धरती के हाथ बढ़ाना क्या जाने
मेरे देश के लाल हठीले शीश झुकाना क्या

जाने
आजादी अधिकार सभी का
जहाँ बोलते सेनानी
विश्व शांति के गीत सुनाती
जहाँ चुनरिया ये धानी’
मेघ साँवले बरसाते है जहाँ

अहिंसा का पानी
अपनी मांगे पोछ डालती
हँसते-हँसते कल्याणी
ऐसी भारत माँ के बेटे
मान गँवान क्या जाने
मेरे देश के लाल हठीले शीश झुकाना क्या
जाने

जहाँ पढाया जाता केवल
माँ की खातिर मर जाना
जहाँ सिखाया जाता केवल
अपना वचन निभाना
जियो शान से मरो शान से
जहाँ का है कौमी गाना

बच्चा-बच्चा पहने रहता
जहाँ शहीदों का बाना
उस धरती के अमर सिपाही
पीठ दिखाना क्या जाने
मेरे देश के लाल हठीले शीश झुकाना क्या
जाने

स्वतंत्रता दिवस पुकारता
है देश की तरुनाई को
उछल दो तिरंगा आकाश में
छू लो अनंत ऊंचाई को
सिंह बन झटपट पड़ो
दुश्मनों में खोफ भर दो

तरकश से निकालो रामबाण
दानवता को खत्म कर दो
भगत सिंह सुभाष चंद्र
आजादी के लिए थे लड़े
आन बान शान राखी देश की
इसलिए वो है बड़े

युवाओं तुम भी समर्थ हो
पैर सोये अलास्ये से हो
प्रचंड सूर्ये हो पर
चमक अपनी भुजाए से हो
ईमानदारी की समाधि पर
बेईमान की फसल मत उगाने दो

अमन को काट कर कभी बैर की
पोध को मत उगने दो
फिरंगी सोच को भगाओ यह
हमारा भला ना कर पाएगी
तोड़ती आई है पहले भी अब
भी यह तोडती ही जायेगी

राष्ट्रगीत गाओ जोश से दोस्तों
पर इतना ही नहीं है काफी
प्रण करो बुराई के आगे ना
झुकोगे ना दोंगे इसे माफ़ी
जिस दिन सम्पूर्ण राष्ट्र देश
भक्ति के जोश से भर जायेग

उस दिन गोरावशाली
स्वतंत्रता दिवस शान से
मन जायेगा

आजादी का आज तिरंगा
ऐसे यूँ लहराता है
जैसे मस्त पवन का झोका

पर्तो को लहराता है
आजादी के इस जलसे को
सारा देश मनाता है

जैसे सारे रंग मिलाकर
एक नया रंग बन जाता है
नई उमग नई तरंग

नया ये दिन कुछ अलग सा है
जैसे सात सुरों से
मिलकर गीत नया बन जाता है

आजादी को पाने खातिर
आजादी के दीवानों ने
खुद को अर्पण किया था

आज आजादी को पाने में
आज के दिन हर एक इंशा
कुछ कर्जदार बन जाता है

आजादी का आज तिरंगा
ऐसे यूँ लहराता है
जैसे मस्त पवन का झोका
पर्तो को लहराता है

मुझको मेरा देश पसंद है
इसका हर एक सन्देश पसंद है
इसकी मिट्टी में मुझको
आती सोंधी से सुघंध है

इसकी हर एक बात निराली है
इसकी हर सौगात निराली है
इसके वीरो की गाथा सुन
आती एक नई उमंग है

कितनी भाषा कितने लोग
हर एक की एक नई सोच है
संस्कृति सभ्यता भले हो भिन्न पर
मिलते एकता के चिन्ह

जो गर देश पर आ जाये आंच
एक होकर सब आते साथ
मेरा देश है बड़ा महान
ये है एक गुणों की खान

देखली हम ने सारी दुनिया
पर देखा ना भारत जैसा
इस मिट्टी में जन्म लिया है
इसकी हवाओ की ठंडक से
सांसे पाती नया जन्म है

रिश्तों के जाल में
कैसे रहते हो इस हाल में
क्यूँ बुन रहे हो ये जाल
कौन अपना है कौन पराया

इस जाल में फँस
जाओगे एक दिन
आँख खुलेगी तो
पछताओगे एक दिन

ये हिन्दू, ये मुस्लिम
ये सिख, ये इसाई
किस इंशान में नहीं बुराइ
ये बता दो मेरे भाई

देश को बाँटने का चलता
रहता है सिलसिला तुम्हारा
कभी बैठ के सोचो क्या
किसी के जितने से कोई हारा

क्यूँ अटक गए हो जात-पातो में
दूरियां बढती है इन फसादों में
देश के टुकडे कर दिए इतने
दरार पड़ गयी मीनारों में

देश की एकता में
छिपी है सफलता इसकी
कुछ अच्छा भी कर
जाओ हयात में

देश भक्ति कविता पर लिखा गया लेख अगर आपको पसंद आये तो आप इसे फेसबुक, व्हाट्सएप्प, ट्विटर इत्यादि पर जरुर शेयर करे|

अगर आपको कोई स्पीच या फिर कविता आती है और आप उसे हमारी वेबसाइट पर अपलोड करवाना चाहते है तो फिर आप हमे कमेंट बॉक्स में लिख सकते है.

हम आपके लिए ऐसी नए – नए लेख लेकर आते रहेंगे| इसलिए आप हमारी वेबसाइट का नोटिफिकेशनओन कर ले जिससे आपको हमारे हर लेख की जानकारी मिलती रह करेगी.

आपको HindiMeStatus.com टीम की और से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ|

अन्य लेख⇓

Leave a Reply